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Cardiology: Heart Attack Mechanism | दिल का दौरा कैसे होता है?

Mechanism of Heart Attack explained in Hindi
दिल का दौरा कैसे होता है?

आरटेरी (artery) किसको कहते हैं?

आरटेरी, उस रक्त वाहिका को कहते हैं जो शरीर में खून पहुंचाता है। उसका उल्टा है वेन (vein), जो कि शरीर से खून को वापस दिल में लाता है।

कोरोनरी आरटेरी (coronary artery) किसको कहते हैं?

शरीर में खून पहुंचाने ले लिये दिल एक पंप के जैसे काम करते रहता है। इस पंप को सदैव चालू रखने के लिये दिल में खून का सप्पलाई एक अलग रक्त वाहिका के द्वारा करते हैं, जिसे कोरोनरी आरटेरी कहते हैं। दिल में दो कोरोनेरी आरटेरी होते हैं – जो कि दायं और बायं ओर जाते हैं। दायां आरटेरी फिर पीछे के तरफ खून पहुंचाता है। बायां कोरोनेरी एक तना, दिल के आगे के तरफ खून पहुंचाता है।

एथेरोस्कलेरोसिस (atherosclerosis) किसको कहते हैं?

शरीर में अधिक चिकनाई या फैट होने पर विभिन्न जगहों पर जमा होने लगते हैं। एक ऐसा जगह है, रक्त वाहिका। उसके दीवार के अंदर चिकनाई जमा हो सकता है। उस पर से समय के साथ कैलशियम और अन्य चीज भी उस चिकनाई में जमा होते रहते हैं, और जमाव को पलाक (plaque) कहते हैं। इससे उस रक्त वाहिका का आंतरिक व्यास कम हो जाता है। इस सारे क्रम को एथेरोस्कलेरोसिस कहते हैं।

कोरोनेरी आरटेरी डिसइज़ (coronary artery disease) किसको कहते हैं?

जब कोरोनेरी आरटेरी के अंदर एथेरोस्कलेरोसिस हो जाता है, तो उसे कोरोनेरी आरटेरी डिसइज़ कहते हैं। इससे दिल के विभिन्न भागों को कम खून मिलता है, और दिल सही तरह से काम नहीं कर पाता है। कभी-कभार अचानक इस पलाक पर घाव बन जाने पर, खून जम जाता है, और फिर अचानक दिल के किसी कोने में खून का सप्पलाई बंद हो जाता है। इसे दिल का दौरा या हार्ट अटैक (Heart attack) कहते हैं। बगैर ततकाल इलाज के, यह जानलेवा हो सकता है।

विस्तार से बतायें कि कोरोनेरी आरटेरी क्यों संकुचित होता है?

अपने घर के बगीचे में पाने पटाने के लिये आप अलग अलग पाईप रखे हैं। मान लिजीये कि किसी कारण से अगर कोई पाईप खराब हो गया तो बगीचे का कोई कोना को पानी मिलना बंद हो जायेगा। और अगर किसी और तरीके से पानी नहीं मिला तो घास मर जायेगा। ठीक उसी तरह से कोरोनेरी आरटेरी डिसइज़ होता है।
कोरोनेरी आरटेरी और उसके शाखा, दिल को खून पहुंचाते हैं। ये पाईप के जैसा होता है। शरीर में अधिक चिकनाई होने पर, अधिक फैट, कोरोनेरी आरटेरी और उसके विभिन्न शाखा पर जमने लगता है। यह सभी लोगों में बचपन से ही शुरू हो जाता है। अधिक चिकनाई युक्त खाना खाने से यह क्रम तेज हो जाता है। खून में बहते अनेक चीज और सेल, जैसे कि कैलशियम और प्रोटीन, इस चिकनाई में समाने लगते हैं और इसका आहिस्ता-आहिस्ता साईज बढते रहता है। इसको फिर पलाक कहते हैं, और उस रक्त वाहिका के क्रम को एथेरोस्कलेरोसिस (atherosclerosis) कहते हैं। इसको रक्त वाहिका का कड़ा होना या हारडेनिंग (Hardening of arteries) भी कहा जाता है।
समय के साथ पलाक का उपरी सतह, कवच के जैसा कड़ा हो जाता है। लेकिन अंदर से फिर भी नर्म रहता है। कभी-कभार उपरी कवच में दरार पर जाता है। इससे अंदूरनी चिकनाई उभर पड़ता है। इसपर खून जमने लगता है, और खून का थक्का बन जाता है। खून में उपस्थित अनेक प्रोटीन और पलेटलेट्स सेल के द्वारा यह होता है। यह थक्का अगर रक्त वहिका को पूरा जाम कर दिया तो तुरंत आगे के लिये खून का सप्प्लाई बंद हो जाता है, जिससे दिल का दौरा पड़ता है। ततकाल इलाज में एक दवा यह भी दिया जाता है जो कि खून को थक्का बनने से रोके या तुंरत बने हुये थक्का को गलाये और रक्त प्रवाह को फिर से स्थापित करे।
अगर बहुत समय से यह रुकावट बन रहा है, तो शरीर नये रक्त वहिका बनाता है, जो कि अतीरिक्त खून सप्पलाई करने के लिये होता है। उदाहरण के लिये अगर आपके बगीचे में कोई पाईप ठीक से काम नहीं कर रहा है, तो आप अतीरिक्त पाईप लगा दें। उसे “कोलेटरल सरकुलेशन” (collateral circulation) कहते हैं। यह सामान्य स्थिती में काम दे सकता है। लेकिन क्योंकि ये नये रक्त वाहिका पतले होते हैं, तो कभी बहुत मेहनत करने पर पूर्णरूप से खून नहीं पहुंचा पाते हैं।

कोरोनेरी आरटेरी के जाम होने से क्या हो सकता है?

कोरोनेरी आरटेरी या उसके शाखा के पूर्ण जाम होने से अलग-अलग तरह के लक्षण हो सकते हैं। सभी को मिलाकर “कोरोनेरी सिंड्रोम” कहते हैं। ये तीन प्रकार के होते हैं -
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