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Measles | मीजल्स


Measels Rash
मीजल्स के फुंसी, (c) CDC PHIL, #3168

1.  संक्षिप्त वर्णन

  • प्रकार - एक तरह का संक्रमित बीमारी
  • कारण - रुबीयोला वायरस (Rubeola Virus)
  • प्रसार - छूने से और सांस लेने से फैलता है
  • अन्य नाम - "रुबीयोला (Rubeola)", "रेड मीजल्स" या "हार्ड मीजल्स"
  • मुख्य लक्षण – बुखार, फुंसी, खांसी, छींकना, आंखों में लालिमा, खाने-पीने में तकलीफ
  • इलाज - इसका लक्षण के अनुसार, प्रमुख इलाज घर पर ही होता है

2.  प्रकार

मीजल्स दो प्रकार के होते हैं। वो हैं -
  1. रुबीयोला वायरस (Rubeola Virus) द्वारा “मीजल्स” या “रेड मीजल्स” या “हार्ड मीजल्स” होता है। यह अधिक गम्भीर बीमारी फैलाता है।
  2. रुबेल्ला वायरस (Rubella Virus) द्वारा “जर्मन मीजल्स” या “3 डे मीजल्स” होता है। यह मामूली बीमारी फैलाता है, किंतु अगर यह किसी गर्भवती महिला को हुआ, तो पेट में पल रहे बच्चे को नुकसान पहुंचा सकता है।
यहां पर रुबीयोला वायरस (Rubeola Virus) द्वारा “मीजल्स” के बारे में बताया गया है।

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3.  मीजल्स - एक विडीयो

4.  प्रसार

मीजल्स रुबीयोला वायरस के संक्रमण से होता है। यह वायरस एक व्यक्ति से दूसरे वयक्ति तक हवा से, जैसे कि छींकने से या खांसने से, अथवा छूने से जैसे कि हाथ मिलाने से या किसी मरीज द्वारा छुये गये वस्तु को छूने से हो सकता है। यह वायरस बहुत प्रबल होता है, जिससे कि किसी मरीज़ के फुंसी के फूटने से भी वायरस हवा में फैल सकता है, और दूसरों को संक्रमित करने में सक्षम होता है।
मीजल्स का मरीज़, अपने बीमारी के फुंसी निकलने के 4 दिन पहले से लेकर फुंसी निकलने के 4 दिन बाद तक, यह बीमारी फैला सकता है। इसका अर्थ है कि बगैर इस ज्ञान के कि किसी को मीजल्स है, कोई दूसरा व्यक्ति किसी मरीज के संगति में रह सकता है। जिस दूसरे व्यक्ति को किसी मरीज से सामना होता है, और अगर उसको मीजल्स के खिलाफ इम्युनिटी या प्रतिरक्षा नहीं है, तो उसको भी 1 से 2 हफ्ते में मीजल्स हो सकता है। इस समय को इनक्युबेशन पिरीयड (incubation period) कहते हैं, जिस दौरान उसको कोई लक्षण नहीं होता है। लेकिन इस समय उसके शरीर में वायरस पनप रहा होते हैं, और वायरस का गिनती बढ़ते रहता है।

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5.  लक्षण

बच्चों में इस बीमारी के मुख्य लक्षण हैं – तेज़ बुखार, बहुत अधिक खांसी, सर्दी, छींकना, नज़ला, गले में खराश, गला दुखना, आंखों में लालिमा या कंजंकटीवाईटिस (Conjunctivitis), थकान, खाने-पीने में तकलीफ, दस्त, भूख नहीं लगना, शरीर में पानी का कमी या डिहाईड्रेशन, सिरदर्द, गले में लिम्फ ग्लेंड्स (Lymph glands) का सूजना और अन्य बातें।
जब ये अनेक लक्षण 2 से 4 दिनों में कम होने लगते हैं, तो फुंसी शुरू हो जाता है। शुरू में, मुंह के अंदर गाल पर स्लेटी रंग (gray) का फुंसी होता है, जिसे कोप्लिक स्पोट (Koplik’s Spot) कहते हैं। खसरे का दाना शुरू में कान के पीछे निकलता है| उसके बाद फुंसी चेहरे पर आता है, और फिर जल्द ही सारे शरीर में फैल जाता है। ये फुंसी शुरू में अलग-अलग लाल दाने के जैसे निकलते हैं, लेकिन बाद में जाकर मिल जाते हैं, जिस कारण से इसको "रेड मीजल्स” या “हार्ड मीजल्स” कहा जाता है। चिकनपोक्स के विपरीत, मीजल्स के फुंसी से खुजली नहीं होता है। खसरे के दाने करीब १ हफ्ते रहते हैं| बाद में ये कुछ दाग छोड़ सकते हैं|

6.  समस्या

इस बीमारी से, कभी कभार मरीज अंधे भी हो सकते हैं, या फिर जान भी जा सकती है|

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This page was last modified by Ravi Mishra on January 24, 2010, at 11:33 PM EST. Copyright 2008-2010 Nirog.info. All rights reserved.
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