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Medication: Anti Retro Viral Therapy | एंटी रिट्रो वाइरल थेरापी

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  1. 1. एंटी रिट्रो वाइरल थेरापी (ART)
  2. 2. एच आइ वी का जीवन चक्र
  3. 3. मान्यता प्राप्त एंटी रिट्रो वाइरल दवा कया हैं?
    1. 3.1 NRTI
    2. 3.2 NNRTI
    3. 3.3 PI
    4. 3.4 FI
  4. 4. ये दवाओं को केसे लेना चहिये?
  5. 5. कया ये दवाऎं एड्स का इलाज़ कर सकते हैं?
  6. 6. मुझे ये दवाऎं कब शुरू करना चाहिये?
  7. 7. मुझे कौन कौन दवाऎं शुरू करना चाहिये?
  8. 8. और भी कोई दवाऎं हैं?

1.  एंटी रिट्रो वाइरल थेरापी (ART)

एंटी रिट्रो वाइरल थेरापी का मतलब है, वो दवाऎं जो एच आइ वी जैसे “रिट्रो वाइरस” के प्रतिकूल काम करते हैं। ये एच आइ वी का सफाया नहीं करते हैं, बल्कि उनकी तादाद को बढने से रोकते हैं, जिससे एच आइ वी बीमारी का प्रगति धीरे हो जाता है। एंटी रिट्रो वाइरल दवा को “ए आर वी” (ARV) कहते हैं। एंटी रिट्रो वाइरल थेरापी या इलाज को “ए आर टी” या ART कहते हैं।

2.  एच आइ वी का जीवन चक्र

"HIV Life Cycle | HIV Life Cycle

एच आइ वी का जीवन चक्र में अनेक क्रम हैं। संक्षिपत में, एच आइ वी वाइरस किसी व्यक्ति के कोशिका को संक्रमित करके, अनेक वाइरस बनाता है।

3.  मान्यता प्राप्त एंटी रिट्रो वाइरल दवा कया हैं?

हरेक वर्ग का एंटी रिट्रो वाइरल थेरापी, अलग अलग तरह से काम करता है। यहां कुछ दवाई और उनके वर्ग के बारे में बताया गया है।

रिवर्स ट्रांसकृपटेज़ (reverse transcriptase enzyme), जो वाइरस के “एक तार जीन” को “दो तार जीन” में बदलता है (चित्र 4), उसको दो प्रकार से रोक सकते हैं। यह वाइरस के “एक तार जीन” के एक अंग (नुकलीयोसाईड या nucleoside) के बनावट के उपर निर्भर करता है। ये दवा हैं -

3.1  NRTI

“नुकलीयोसाईड के बनावट के जैसा” रोकनेवाला दवा को “नुकलीयोसाईड रिवर्स ट्रांसकृपटेज़ इनहीबिटर” (nucleoside reverse transcriptase inhibitor, NRTI) कहते हैं। उनके नाम हैं -

3.2  NNRTI

“नुकलीयोसाईड के बनावट के जैसा नहीं” रोकनेवाला दवा को “नोन नुकलीयोसाईड रिवर्स ट्रांसकृपटेज़ इनहीबिटर” (non nucleoside reverse transcriptase inhibitor, NNRTI) कहते हैं।

3.3  PI

प्रोटियेज़ एंज़ाइम के द्वारा, वाइरस के लम्बे प्रोटीन को काट-छाँट कर छोटा किया जाता है, ताकि वाइरस विकसित हो सके (चित्र 10)। इसको रोकनेवाला दवा को “प्रोटियेज़ इनहीबिटर” कहते हैं।

3.4  FI

एक नया प्रकार का दवा, एच आइ वी वाइरस के बंधन और मेल को रोकता है, उसे “फ्युज़्न एंड ऎटाचमेंट इनहीबिटर” (fusion and attachment inhibitor) कह्ते हैं (चित्र 2)।

4.  ये दवाओं को केसे लेना चहिये?

जब एच आइ वी वाइरस का तादाद बढता है, तो नये विकसित वाइरस के जीन में कुछ बदलाव आ जाता है, जैसे कोई बच्चा अपने जन्मदाता के रूप और अन्य गुणों से अलग होता है। इस परिवर्तन को “म्युटेशन” (mutation) कहते हैं।
कुछ परिवर्तन, दवा लेने के बावज़ूद, होते रहते हैं। जब यह होता है, तो दवा काम करना बन्द कर देता है और एच आइ वी का तादाद अनियंत्रित रूप से बढने लगता है। इस बाधा को उस दवा के लिये “रेसिसटेंस” (resistance) कहते हैं।
अगर एक दवा लेते हैं, तो “रेसिसटेंस” होने का संभावना अधिक रहता है। अगर दो दवा लेते हैं, तो “रेसिसटेंस” होने का संभावना कम रहता है। अगर तीन दवा लेते हैं, तो एक साथ तीनों दवा के लिये “रेसिसटेंस” होने का संभावना बहुत कम रहता है।
तीन दवा लेने का मतलब है कि “रेसिसटेंस” होने में बहुत समय लगेगा, और एच आइ वी के वाइरस बढ नहीं पायेंगे। इसी कारण से, केवल एक दवा लेने के लिये सलाह नहीं दिया जाता है।

5.  कया ये दवाऎं एड्स का इलाज़ कर सकते हैं?

एक जाँच है जिसे “वाइरल लोड टेस्ट” कहते हैं, जो यह गिन सकता है कि आपके खून में कितना “एच आइ वी का वाइरस” है? जिनके “वाइरल लोड टेस्ट” में कम वाइरस पाया जाता है, वो सालों तक स्वस्थ्य रह सकते हैं। कुछ लोगों का वाइरस इतना कम होता है कि “वाइरल लोड टेस्ट” में कोइ वाइरस नहीं निकलता है, इसका यह मतलब नहीं है कि सम्पूर्ण वाइरस का सफाया हो गया है। शोधकर्ता पहले समझते थे कि इलाज से सम्पूर्ण वाइरस का सफाया हो सकता है। लेकिन ऎसा नहीं है। एड्स के दवा सम्पूर्ण वाइरस का सफाया नहीं कर सकते हैं। ये दवा जरूर से आपको लम्बे समय तक स्वस्थ्य जीवित रख सकते हैं।

6.  मुझे ये दवाऎं कब शुरू करना चाहिये?

इस बात का कोइ सही जवाब नहीं है। आधिकाँश डाक्टर तीन बातों का ध्यान रखेंगे – 1. वाइरल लोड टेस्ट 2. सी डी 4 सेल काउंट टेस्ट 3. आपके लक्षण

एंटी रिट्रो वाइरल थेरापी (ART), इन हालात में शुरू कर दिया जाता है – 1. वाइरल लोड 1,00,000 से उपर 2. सी डी 4 सेल 350 से कम 3. एच आइ वी का कोइ लक्षण हो

दवा शुरू करना एक महत्वपूर्ण कार्य है, और आपको अपने डाक्टर से सलाह लेना चाहिये।

7.  मुझे कौन कौन दवाऎं शुरू करना चाहिये?

इस बात का कोइ सही जवाब नहीं है। हरेक दवा के अच्छे प्रभाव के साथ, हानिकारक प्रभाव भी होते हैं। कुछ दवाओं का मिक्ष्रित प्रभाव उम्दा होता है, तो कुछ दवाओं के मिक्ष्रण का न्युनत्म हानिकारक प्रभाव होता है, जो कि आप सह सकते हैं।
हर व्यक्ति का स्थिती अलग होता है, और आपको अपने डाक्टर के साथ मिलकर निश्चित करना चाहिये कि आपके लिये कौन सा दवा अच्छा होगा। महत्वपूर्ण बात यह है कि आपको अपने बीमारी, जाँच, दवा और अन्य चीज़ों के बारे में रुचि और जिम्मेदारी लेना होगा।
आपके दवाओं का असर जानने के लिये “वाइरल लोड टेस्ट” किया जाता है। अगर वाइरस की गिनती कम नहीं होता है, या कम होने के बाद फिर अधिक होने लगता है, तो इसका मतलब है कि आपका दवा काम नहीं कर रहा है। अब आपको अपने डाक्टर से दवा बदलने के लिये पूछना चाहिये। बगैर डाक्टर के सलाह के, कभी ये दवाऎं बदलना या बन्द नहीं करना चाहिये।

8.  और भी कोई दवाऎं हैं?

दुनिया भर में एच आइ वी और एड्स के प्रतिकूल काम करने के लिये नये दवाओं का शोध चल रहा है। और अन्य वर्गों में, जैसे कि एच आइ वी के जीवन चक्र को रोकने के लिये या फिर शरीर की प्रतिरक्षा को बढाने के लिये, उनके लिये भी दवा इज़ाद किया जा रहा है।
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