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Signs of a Sick Newborn | नवजात शिशु में गम्भीर बीमारी के लक्षण


1.  नवजात शिशु

नवजात शिशु जन्म से लेकर पहले 28 दिन के बच्चे को कहते हैं? यहां नवजात शिशु, जो कि जन्म से पहले दो महीनों के उम्र के होते हैं, उनके बारे में बताया गया है।

2.  मृत्यु दर

विश्व में करीब 40 लाख नवजात शिशु का विभिन्न बीमारीयों से मौत हो जाता है। इसमें से करीब 30 लाख बच्चों का मौत, जन्म के बाद पहले 7 दिन में हो जाता है।
भारत में करीब 18 लाख बच्चों (1 साल से कम उम्र के) का विभिन्न बीमारीयों से मौत हो जाता है। इसमें से करीब 12 लाख बच्चों का मौत पहले 28 दिन में हो जाता है और इसमें से करीब 9 लाख बच्चों का मौत पहले 7 दिन में हो जाता है। अभी भी अधिकतर बच्चे घर पर पैदा होते हैं, या रिती-रिवाज के कारण बाहर नहीं निकाले जाते हैं।

3.  गम्भीर बीमारी के लक्षण

नवजात शिशु में बहुत सारे बातें होती हैं, जो समय के साथ बदलते रहता है। उसपर से नये मां-बाप बनने पर अनेक चीजें चल रहा होता है, कि ध्यान बंटा होता है, या थकान होता है, या घर में अनेक राय फ्री में मिलता है, या समझ में नहीं आता है कि बच्चे का कोई लक्षण सामान्य है या कोई गम्भीर बीमारी का चेतावनी है। जैसे कि कभी यह समझ नहीं आता है कि क्या यह केवल साधारण जुकाम है या जानलेवा बीमारी से सांस तेज है। यही सोच-विचार में हालत बिगड सकता है, और डाक्टर के पास जाने में बहुत देर भी हो सकता है। उस पर से आधिकांश समय, बच्चे को एक साथ दो-तीन बीमारी भी हो सकता है, जो भारी पर सकता है।
शरीर का बनावट में दिमाग को खास करके बचाया जाता है। इससे खून में और दिमाग के बीच एक बाधा रहता है, जिसे “बल्ड ब्रेन बैरियर” कहते हैं। यह बीमारीयों से भी बचने में मदद करता है। नवजात शिशु में यह बाधा कमजोर होता है। इस कारण कोई भी संक्रमित बीमारी होने पर, नवजात शिशु के दिमाग में फैल सकता है, जिसे मेंनिनजाईटिस (meningitis) कहते हैं। यह बीमारी दवा से ठीक भी सकता है, लेकिन कभी-कभार दुर्भाग्य से दिमाग में खराबी, अपंगता, बहिरता कर सकता है या फिर जानलेवा भी हो सकता है।
पहले दो महीनों में कोई भी बच्चा बहुत नाजुक होता है। उसमें कोई बीमारी को रोकने का उतना क्षमता नहीं होता है। अगर कोई बीमारी किसी नवजात शिशु को हो जाता है, तो उसका इलाज जरूरी है, और पूरे समय तक बताये हुये दवा को लेना चाहिये। ऐसा कभी नहीं करना चाहिये कि बुखार उतर गया या उल्टी रुक गया तो दवा छोड दें। यह बच्चे को नुकसान पहुंचा सकता है।
इसीलिये माता-पिता का कर्तव्य बनता है कि खास करके पहले दो महीनों में बच्चे को बीमारीयों से बचाये, और जरा भी संदेह होने पर कोई डाक्टर, खास करके बच्चों के डाक्टर से दिखलाने में कोई हरजा नहीं है। देर करने से इलाज में परेशानी तो होता ही है, पैसा भी अधिक खर्च होता है, और बच्चे को नुकसान भी पहुंच सकता है।

4.  डाक्टर के पास कब जायें

जनवरी 2008 में एक नये रिसर्च, जो कि “The Lancet” नामक मेडिकल पत्रिका में छपा था, उसमें विकासशील देशों में करीब 8,000 नवजात शिशु पर ये लक्षणों पर शोध किया गया था। यहां उसमें कुछ महत्वपूर्ण बातों को दर्शाया जा रहा है, कि आप भी किसी शिशु में कोई लक्षण पहचान सकें, और डाक्टर के पास ले जाने में देर न करें। ध्यान रहे कि इसके अलावा भी कुछ लक्षण हो सकते हैं, जो आपको लगे कि कुछ ठीक नहीं है तो डाक्टर के पास ले जायें।
अगर आपके नवजात शिशु को नीचे लिखे हुये 12 लक्षणों में से कुछ भी हो रहा है, तो शीघ्र डाक्टर के पास जायें। इन लक्षण के होने पर 80 प्रतिशत समय बच्चा को सही में कोई बीमारी होता है। ब्रेकेट में दिये नंबर यह बताता है कि किसी स्वस्थ बच्चे के अनुपात में यह लक्षण होने पर रोगी बच्चे में कितना गुणा अधिक बीमार होने का संभावना है?
  • खाना –
    • खाने में दिक्कत (feeding problems) – बच्चा पहले से कम खा रहा है, उल्टी कर रहा है (10)
  • दिमागी -
    • झटके आना (convulsions) (15)
    • अत्याधिक सोना, बेसुध होना या बेहोशी होना (unresponsive) – अगर बच्चा में कोई नया बदलाव आया है और लगातार 4 – 5 घंटे से उपर सो रहा है, तो ध्यान देना चाहिये। (3)
    • छूने या हिलाने पर ही शिशु हिलता-डुलता है (7)
  • सांस संबंधी -
    • सांस तेज होना – प्रति मिनट, अगर आपका बच्चा का सांस 60 बार या उससे अधिक ले रहा है (tachypnea), तो यह असमान्य है (3)
    • सांस छोडते समय आवाज निकालना, जिसे ग्रंटिंग (grunting) कहते हैं। यह खर्राटा या अंगडाई लेते हुये आवाज को नहीं कहते हैं। (3)
    • सांस लेते हुये, छाती अंदर के तरफ खीचंना, जिसे छाती में हड्डीयां दिखने लगता है। इसे रिट्रेक्शं कहते हैं (retractions) । (9)
  • तापमान -
    • बुखार होना (fever, hyperthermia) - बच्चे का तापमान 37.5 डिग्री सेंटीग्रेड या उससे अधिक होना (3)
    • ठंडा होना (cold, hypothermia) - बच्चे का तापमान 35.5 डिग्री सेंटीग्रेड या उससे कम होना (9)
  • रंग -
    • नाखून में खून का बहाव कम (reduced capillary fill time) होना (10)
    • होंठ या नाखून नीला (cyanosis) होना (14)
  • हाथ-पैर -
    • हाथ-पैर में अकड़न (stiffness) होना (15)
  • इन सबसे अलग, अगर कोई बच्चा को पिलीया या जाउंडिस (jaundice) हो तो उसे जरूर डाक्टर को दिखलाना चाहिये। नवजात शिशु में पिलीया के बारे में यहां बताया गया है।

5.  सन्दर्भ

आपका स्वास्थ्य

आपका खाना

प्रसिद्ध विषय

इंटरनेट पर संबंधित जानकारी

खबरें चित्र विडीयो सन्दर्भ लिंक्स
रिसर्च विकिपेडिया

सम्बंधित लिंक्स

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This page was last modified by Ravi Mishra on February 19, 2010, at 05:57 AM EST. Copyright 2008-2010 Nirog.info. All rights reserved.
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