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Nutrition: Artificial Sugar | आर्टिफिशियल शुगर

अधिक चीनी खाने से क्या होता है?

चीनी खाने से आपको दो चीज़ मिलता है – मिठास और उर्जा या कैलोरीज़। मिठास आपके मन के संतोष के लिये होता है, और उर्जा आपके तन के संतोष के लिये होता है। लेकिन, अगर आप जरूरत से ज्यादा चीनी खाते हैं, तो अतिरिक्त उर्जा या कैलोरीज़ आपके शरीर में फेट या चर्बी के रूप में जमा होकर आपका मोटापा बढाता है। इससे शरीर अनेक बीमारी को न्योता देता है, जैसे कि डायबिटीज़ और हृदय का रोग। इससे बचने के लिये जरूरत है कि आपको चीनी युक्त खाद्य पदार्थ पर नियंत्रण रखना चाहिये। इसके लिये पिछले कुछ दशकों में हजारों रिसर्च करके अनेक बनावटी चीनी का निर्माण किया गया है।

आर्टिफिशियल शुगर या बनावटी चीनी क्या होता है?

बनावटी चीनी उस पदार्थ को कहते हैं जो चीनी के जैसा मीठा होता है, और चीनी से कम उर्जा या कैलोरीज़ प्रदान करता है। इससे आपके मन को मिठास खाने का संतोष भी मिलता है, और साथ ही शरीर को अत्याधिक कैलोरीज़ भी नहीं मिलता है।

खाने में से उर्जा या कैलोरीज़ कैसे मिलता है?

शरीर खाना से मिले कारबोहाईड्रेट, प्रोटीन और फेट को अनेक काम में लगाता है। इसमें से कारबोहाईड्रेट, जैसे कि चावल या गेहूं का मुख्य अंश, को पचा कर उर्जा निकाला जाता है। साथ ही पानी और कार्बन डाईओक्साइड गेस का निर्माण होता है, जो कि शरीर से पेशाब या सांस के द्वारा निकाल दिया जाता है। यह उर्जा शरीर के संचालन में काम आता है। अतिरिक्त उर्जा या कैलोरीज़ आपके शरीर में फेट या चर्बी के रूप में जमा होकर आपका मोटापा बढाता है।

खाने के गुण को कैसे महसूस किया जाता है?

जीभ पर खाने के गुण को महसूस को करने के लिये रिसेप्टर या इन्द्रिय बोधक होते हैं। इसमें खाने के तत्व किसी अतिविशेष रिसेप्टर के साथ जुडते हैं, जैसे कि कोई चाभी किसी विशेष ताले से जुडता है। इससे खाने का मिठास, नमकीन, खट्टा, कडवाहट इत्यादि के गुण को महसूस किया जाता है। यह बोध फिर नर्व्स या नसों द्वारा दिमाग के विशेष जगह पर भेजा जाता है। इससे आप समझते हैं कि आप मीठा, नमकीन, खट्टा, कडवाहट इत्यादि खा रहे हैं।

क्या खाने के मिठास को सभी जानवर एक जैसा महसूस करते हैं?

खाने के मिठास को पहचानने के लिये जीभ पर रिसेप्टर या इन्द्रिय बोधक होते हैं। यह टी-1-आर-3 (T1R3, TAS1R3) के प्रकार के होते हैं, जो कि मनुष्य और बन्दर में पाया जाता है, किंतु चूहे में नहीं होता है। इसलिये जहां आपको चीनी मीठा लगता है, तो यह चीज चूहे को मीठा नहीं लगता है, क्योंकि उनमें यह रिसेप्टर ही नहीं होता है।

विभिन्न खाने का मिठास क्यों अलग रहता है?

जहां खाने के मिठास को पहचाने के लिये खाने के तत्व और उसके विशेष रिसेप्टर को मिलना जरूरी है, सभी खाना एक रंग जैसा मीठा नहीं होता है। इसके लिये दो बातें होती हैं – कि खाने में मीठासकारक तत्व का क्या प्रकार है और वो कितना है।
  1. मीठासकारक तत्व के प्रकार का मतलब है कि खाने में मिठास के कण और रिसेप्टर के बीच में कैसा रिश्ता है? जितना अधिक रिश्ता होगा, उतना अधिक कण और रिसेप्टर के बीच में बंधंन होगा। उल्टे, जितना कम रिश्ता होगा, उतना कम कण और रिसेप्टर के बीच में बंधंन होगा। उदाहरण के लिये केला, सेब से अधिक मीठा होता है, क्योंकि चीनी के विभिन्न कण के प्रकार अधिक होते हैं।
  2. दूसरा बात होता है, कि उस कण का मात्रा क्या है? जितना अधिक मात्रा होगा, उतना अधिक कण और रिसेप्टर के बीच में बंधंन होगा। उल्टे, जितना कम मात्रा होगा, उतना कम कण और रिसेप्टर के बीच में बंधंन होगा। उदाहरण के लिये आप खीर बनाते हैं, लेकिन उसका मिठास हर बार एक समान नहीं रहता है। कभी अधिक मीठा होता है, तो कभी कम; और यह निर्भर करता है कि आपने उसमें कितना चीनी का मात्रा दिया है?

आर्टिफिशियल शुगर या बनावटी चीनी कैसे काम करते हैं?

बनावटी चीनी में भी मिठास के कण होते हैं, जो कि सामान्य चीनी में पाये जानेवाले ग्लुकोज़ से अलग होते हैं। इन कणों के प्रकार और मात्रा के अनुसार मिठास का अनुभव होता है। ये कण बहुत कम उर्जा में परिवर्तित होते हैं, जिससे कि ये कोई खास कैलोरीज़ नहीं प्रदान करते हैं। विभिन्न प्रकार के उपर निर्धारित अनेक कृतिम चीनी बनाया गया है, जिसे आर्टिफिशियल शुगर या बनावटी चीनी कहा जाता है। कुछ प्राकृतिक रूप में भी चीनी के मिठास जैसे पदार्थ होते हैं, लेकिन उनसे उर्जा का भी प्राप्ति होता है, और उनको आर्टिफिशियल शुगर या बनावटी चीनी नहीं कहा जाता है।

संदर्भ

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