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Energy | एनर्जी या उर्जा


1.  उर्जा किसको कहते हैं?

उर्जा शक्ति को कहते हैं, जो जीवन का आधार है। हर जीवित प्राणी, अर्थात मनुष्य, पेड-पौधे, पशु-पक्षी और जीवाणु-किटाणू को जीवित रहने के लिये उर्जा चाहिये होता है। मनुष्य इस उर्जा को खाने से प्राप्त करते हैं। हर खाद्य प्दार्थ को पचाकर, उसको उर्जा में परिवर्तित किया जाता है।
शरीर में यह उर्जा दो प्रकार से इस्तेमाल होता है; पहला सामान्य दैनिक जीवन के लिये और दूसरा कोई भी कार्य करने के लिये।
सामान्य दैनिक जीवन का मतलब है कि आप लेटे हुय हैं जैसे कि सोते समय या आप बैठे हैं और कोई काम नहीं कर रहे हैं, जैसे कि टीवी (Television) देखते समय। शरीर को इस स्थिर स्थिती में भी निरंतर उर्जा चाहिये होता है शरीर में अनगिनत काम को पूरा करने के लिये, जैसे कि सांस लेना, दिल का धडकना, खाना पचाना, खून का प्रावाहित होना इत्यादि।
इस पर से आप कुछ भी करते हैं, जैसे कि चलना, खेलना, घर या बाहर का काम करना, पढाई करना, कमप्युटर पर दिमाग लगाना, बोझ उठाना, बच्चे को खिलाना, बगान में काम करना या कोई भी अन्य तरह का मेहनत करना, उसके लिये आप अतिरिक्त उर्जा खर्च करते हैं। इसके अलावा बीमारी में, जैसे कि बुखार में, अधिक उर्जा खर्च हो सकता है।

उपर लिखे दो तरह के उर्जा खर्चा यह निश्चित करता है कि आपके शरीर को प्रतीदिन कितना उर्जा चाहिये या शरीर का उर्जा डिमांड (Energy Demand) क्या है?

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2.  Energy Balance | एनर्जी बैलेंस या उर्जा का समीकरण क्या होता है?

एनर्जी बैलेंस सभी रोग-निरोग और शांति-अशांति का केंद्र-बिंदु है। हर चीज के लिये उर्जा चाहिये होता है (एनर्जी डिमांड या Energy Demand), जिसे खाना के रूप में पूरा किया जाता है (एनर्जी सप्पलाई या Energy Supply)। तो इसमें तीन तरह कि बातें हो सकती हैं।
  1. एनर्जी डिमांड के बराबर एनर्जी सप्पलाई है (Energy Demand = Energy Supply)। इसका मतलब है कि आप जितना उर्जा खाना से प्राप्त करते हैं, उतना उर्जा आपका शरीर सभी कर्यों में खर्चा करता है, और आपके शरीर पर कोई नया भार नहीं है। इससे आपका वजन समान (Constant Weight) रहेगा।
  2. एनर्जी डिमांड से अधिक एनर्जी सप्पलाई है (Energy Demand < Energy Supply)। इसका मतलब है कि आप जितना उर्जा खाना से प्राप्त करते हैं, उतना उर्जा आपका शरीर सभी कर्यों में खर्च नहीं कर पाता है, और आपके शरीर पर अधिक उर्जा का भार है। शरीर अधिक उर्जा को फेट में बदल कर जमा कर लेता है। इससे आपका वजन अधिक होगा (Weight Gain), और आपको मोटापा और उससे संबंधित बीमारीयों का संभावना बढ जायेगा।
  3. एनर्जी डिमांड के कम एनर्जी सप्पलाई है (Energy Demand > Energy Supply)। इसका मतलब है कि आप जितना उर्जा खाना से प्राप्त करते हैं, उतना उर्जा आपका शरीर के सभी कर्यों में खर्चा करने के लिये काफी नहीं है, और आपके शरीर पर कम उर्जा का भार है। शरीर उर्जा पूर्ती के लिये, पहले से जमा शरीर के फेट को खर्चा करता है। इससे आपका वजन घटेगा (Weight Loss), और आपका मोटापा भी घटेगा। दूसरे तरफ अगर आपको बुखार होता है, तो खाने के अरुचि से और अत्याधिक उर्जा खर्चा से वजन घट सकता है, जैसे कि तैपेदिक में वजन घटता है।

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3.  मुझे वजन घटाने के लिये क्या करना चहिये?

दो तरह से आप वजन घटा सकते हैं, और यह दोनों तरीका साथ में अपनाना चहिये जिससे कि एनर्जी डिमांड के कम एनर्जी सप्पलाई हो सके (Energy Demand > Energy Supply)। पहला कि खाना कम खायें और दूसरा कि शारीरिक मेहनत करें। इसके बारे में इस साईट पर अनेक जगह बताया गया है।

4.  मुझे वजन बढाने के लिये क्या करना चाहिये?

यह उपर से विपरीत स्थिती है, और तभी उसका उल्टा करना होगा कि एनर्जी डिमांड से अधिक एनर्जी सप्पलाई हो सके (Energy Demand < Energy Supply)। इसका मतलब कि खाना अधिक खायें और हो सके तो शारीरिक मेहनत कम करें। इसके बारे में इस साईट पर अनेक जगह बताया गया है।

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5.  उर्जा को कैसे नापा जाता है?

उर्जा को नापने के लिये अनेक तरीके हैं। यहां पर एनर्जी के कुछ युनिट के बारे में जिक्र किया जा रहा है। उर्जा के कुछ युनिट हैं – कैलोरीज (Calories), वाट्स (Watts), मेट्स (Mets)।
  • कैलोरी (Calorie) उर्जा का मुख्य युनिट है। बहुत कैलोरी को कैलोरीज़ (Calories) कहते हैं। इसमें 1 कैलोरी उतने उर्जा या एनर्जी को कहते हैं, जिससे 1 किलोग्राम पानी का तापमान, 1 डिग्री सेंटीग्रेड बढाया जा सके।
  • जूल्स (Joules) उर्जा का एक और युनिट। जैसे इंच और सेंटीमिटर, दूरी नापने के लिये दो तरह के युनिट हैं, जहां 1 इंच, 2.5 सेंटीमिटर के बराबर होता है। उसी तरह से उर्जा नापने के कैलोरीज और जूल्स हैं, जहां 1 कैलोरी, 4200 जूल्स के बराबर होता है। 1 कैलोरी को किलोकैलोरीज भी कहा जाता है, जहां कैलोरी को बडे “सी” से लिखा जाता है। 1 Calorie = 1 Kilocalories = 4200 Joules
  • वाट्स (Watts) = यह पावर का युनिट है, अर्थात आप कितना उर्जा प्रति सेकेंड खर्च कर सकते हैं या कितना उर्जा प्रति सेकेंड बना सकते हैं। इसमें 1 वाट, 1 जूल पर 1 सेकेंड के बराबर होता है। 1 Calorie/Second = 4200 Joules/Second = 4200 Watts
  • बी एम आर या बेसल मेटाबोलिक रेट (BMR or Basal Metabolic Rate) - यह बताता है कि आपका शरीर, संम्पूर्ण आराम के वक्त, कितना उर्जा खर्च करता है? कम से कम इतना उर्जा आपके शरीर को प्रतीदिन चाहिये होता है। यह हर व्यक्ति के लिये अलग होता है, जो कि उसके कद, काया, वजन, उम्र, लिंग, सेहत और अन्य बातों पर निर्भर करता है। अपना बी एम आर निकालने के लिये यहां क्लिक करें।
  • मेट्स या मेटाबोलिक इक्विवेलेंट (Mets or Metabolic Equivalent) - यह बताता है कि आपका शरीर, काम के वक्त, कितना उर्जा खर्च करता है? यह आपके बी एम आर के अनुपात में होता है। जैसे कि अगर आप तेजी से 1 घंटे चलते हैं, और आप करीब अपने बी एम आर से तीन गुणा अधिक उर्जा खर्च करते हैं, तो उसे तीन मेट्स कहते हैं। रिसर्च के द्वारा अनेक खेल-कूद और सामान्य घरेलू कार्य के लिये मट्स का अनुमान निकाला गया है। अंत में, जितना अधिक मेट्स होगा, उतना अधिक वो मेहनत का काम होगा। आपके सेहत के लिये, आप बिना परेशानी के, जितना अधिक मेट्स करने के काबिल होंगे, उतना ही आपका सेहत अच्छा होगा। इसके बारे में अधिक जानने के लिये यहां क्लिक करें

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This page was last modified by Ravi Mishra on January 25, 2010, at 02:52 AM EST. Copyright 2008-2010 Nirog.info. All rights reserved.
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