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STD: Kaposi sarcoma | कपोसी सारकोमा

Kaposi's sarcoma
कपोसी सारकोमा


कपोसी सारकोमा (Kaposi’s Sarcoma): यह एच आइ वी का सबसे प्रकट चिन्ह है। यह चेहरे पर, हाथ और पैर पर देखा जाता है। यह घाव, सफेद रंग के लोगों में, लाल से बैगनी दिखता है, और सांवले लोगों में, भूरा से काला रंग का दिखता है।

कपोसी सारकोमा

कपोसी सारकोमा (के एस) एक तरह का कैंसर है। पहले यह समझा जाता था कि यह बीमारी सिर्फ पूर्वी यूरोपीयन (East European) और भूमध्यसागरीय (Mediterranean) लोगों में होता है। बाद में यह बीमारी अफ्रिका के लोगों में और शारीरिक कमजोर लोगों में भी पाया जाने लगा। अब कपोसी सारकोमा का सबसे प्रमुख्य कारण है – एच आइ वी का संक्रमण।
आधिकांश समय, कपोसी सारकोमा, चर्मरोग होता है, और यह मुँह, नाक और आँख में पाया जाता है। आगे बढने पर, यह फेफडा, कलेजा, पेट, अंतड़ी और लसीकाओं में फैल जाता है। इस बीमारी में बहुत सारे रक्त की वाहिका (Blood vessels) बनती हैं। इसको “एंजिओजेनेसिस” या (angiogenesis) कहा जाता है। यह बीमारी एक प्रकार के हरपीस (Herpes) वाइरस के कारण होता है, जिसे ह्युमन हरपीस वाइरस 8 (Human herpes virus 8) कहते हैं। अभी एक रिसर्च के अनुसार जिन लोगों में यह वाइरस होता है, उनमें कपोसी सारकोमा होने का 12 गुना अधिक सम्भावना होता है।
एच आइ वी संक्रमित लोगों में, जो एच आइ वी का दवा नहीं लेते हैं, उनमें करीब 20% को कपोसी सारकोमा होता है। दवा लेने से यह बीमारी बहुत कम हो जाता है। 2007 में, कुछ नये रिसर्च के अनुसार, अब जो लोग दवा से एच आइ वी को नियंत्रित रखते हैं, उनमें एक नया तरह का कपोसी सारकोमा पाया जाता है, किंतु यह जानलेवा नही होता है।
महिलाओं के अनुपात में, कपोसी सारकोमा, पुरुषों में 8 गुना अधिक पाया जाता है। यह एच आइ वी का सबसे प्रकट चिन्ह है। यह चेहरे पर, हाथ और पैर पर देखा जाता है। यह घाव, सफेद रंग के लोगों में, लाल से बैगनी दिखता है, और सांवले लोगों में, भूरा से काला रंग का दिखता है।
चर्म कपोसी सारकोमा जानलेवा नहीं होता है। किंतु पैर में घाव के कारण, चलने में दिक्कत होता है। अगर शरीर के दूसरे भागों में यह बीमारी फैल जाये, तो परेशानियाँ बढ सकता है। मुँह में घाव से खाने-निगलने में दिक्कत हो सकता है। पेट में घाव से खून बह सकता है। यह लसिकाओं (lymph nodes) को जाम करके, हाथ, पैर, मुँह और अण्डकोश (scrotum) में सूजन कर सकता है। फेफडे में इसके कारण खाँसी, साँस लेने में दिक्कत और पानी जमा हो सकता है, जो कि जानलेवा होता है।
चर्म के घाव से कपोसी सारकोमा का पहचान हो सकता है। घाव चपटा होता है; उसमें दर्द, खुजली और पानी नहीं निकलता है। यह बैगनी रंग का होता है, जिसका रंग घाव दबाने पर भी रहता है। आगे जाकर, ये घाव ऊबड़-खाबड़ हो कर और मिलजुल कर पनपते हैं। डाक्टर, इस घाव के टुकडे (biopsy) से जांच करके रोग का सही पहचान कर सकता है।

इलाज

प्रभावशाली एंटी रिट्रो वाइरल थेरापी (ART) कपोसी सारकोमा का इलाज है। ये दवा चर्म कपोसी सारकोमा को खतम कर सकता है। इसके अलावा अन्य इलाज भी हैं।

अगर चर्म कपोसी सारकोमा के कुछ घाव ही हैं, तो उनका इलाज करने का जरूरत नहीं है। दूसरे इलाज निम्नलिखित प्रकार के हैं –

ये इलाज केवल चर्म कपोसी सारकोमा पर काम करते हैं, और अन्दूरनी बीमारी पर नहीं करते हैं। दवा रोकने पर, चर्म कपोसी सारकोमा के घाव फिर से हो सकते हैं।

अगर कपोसी सारकोमा शरीर के अंदर फैल गया है, तो सम्पूर्ण इलाज कराना चाहिये।

रोकथाम

यह पता नहीं है कि ह्युमन हरपीस वाइरस 8 (Human herpes virus 8) कैसे फैलता है। यह सेक्स या गहरा चुम्मा से फैल सकता है। लेकिन अन्य अवसरवादी संक्रमण के तरह, शरीर के प्रतिरक्षा में कमजोरी होने पर कपोसी सारकोमा होता है। आप सही तरह से प्रभावशाली एंटी रिट्रो वाइरल थेरापी (ART) लेकर कपोसी सारकोमा को रोक सकते हैं।

नये दवा

अभी अनेक दवाओं पर शोध चल रहा है, लेकिन ये अभी इस्तेमाल नहीं किया जाते हैं -

सारांश

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