From Nirog: Health Information in Hindi

STD: HIV Life cycle | एच आई वी का जीवन चक्र

HIV Life Cycle
HIV Life Cycle

शरीर के कोशिकाओं या सेल में एच आई वी का जीवन चक्र

  1. जीन या आनुवांशिक, किसी जीव के शरीर का स्वरूप, कार्य और अन्य गुण निर्धारित करता है। मुक्त वाइरस (free virus) में “एक तार जीन (आर एन ए)”, होता है। मनुष्य के कोशिकों में, “दो तार जीन (डी एन ए)” होते हैं।
  2. बन्धन और मेल (Binding and Fusion) – कोशिका के उपरी स्तर पर अनेक पहचान चिह्न के कण होते हैं। एच आइ वी के वाइरस, इनमें से कुछ विशेष पहचान चिह्न से बन्ध जाता है, जैसे कि किसी ताले से उसकी चाबी, और फिर द्वार खुलना। इसके कुछ पहचान चिह्न के कण हैं, जैसे कि सी डी 4 और इनमें से एक, “सी सी आर 5” या “सी एक्स सी आर 4”।
  3. कोशिकों का संक्रमण (infection) – बन्धन और मेल होने के बाद, वाइरस का जीन, कोशिका में प्रवेश करता है।
  4. रिवर्स ट्रांसक्रिपशन् (Reverse Transcription) – एंज़ाईम द्वारा “एक तार जीन (आर एन ए)” को “दो तार जीन (डी एन ए)” में बदलना।
  5. एकीकरण (Integration) – एंज़ाईम द्वारा, “वाइरस के दो तार जीन” को “मनुष्य के कोशिका के दो तार जीन” को मिलाना, जिस्से की बाद में वाइरस का जीन पढा जा सके।
  6. ट्रांसक्रिपशन (Transcription) – संक्रमित कोशिका के विभाजन के समय, वाइरस का जीन पढे जाने से, एक विशेष प्रकार का परिवर्तनशील “एक तार जीन” बनता है।
  7. ट्रांसलेशन (Translation) – कोशिका में, “वाइरस के एक तार जीन” से “वाइरस का लंबा प्रोटिन” बनाया जाता है।
  8. निर्माण कार्य (Assembly) – वाइरस के विभिन्न प्रोटिन एकजुट होकर नया वाइरस का निर्माण करने लगते हैं।
  9. कली निकलना (Budding) – यह नया अविकसित वाइरस, कोशिका में से, कली के रूप में से निकलने लगता है।
  10. अविकसित वाइरस (Immature Virus) – इस स्थिती में, अविकसित वाइरस, कोशिका से बाहर हो जाता है।
  11. विकसित वाइरस (Mature Virus) – एंज़ाईम द्वारा, “वाइरस का लंबा प्रोटिन” को काट कर, कार्य योग्य “छोटा प्रोटिन” बनाने से, वाइरस पूर्णरूप से विकसित होता है। विकसित वाइरस फिर किसी नये कोशिका को संक्रमित कर सकता है, या दुसरे वयक्ति को एच आइ वी फैला सकता है। यह चक्र, बार बार होने से, वाइरस का तादाद बढता है।

HIV Life Cycle
HIV Life Cycle

Steps of HIV Life cycle in a cell in English:

  1. Free Virus has a nuclear coat enclosing single strand of viral gene, present as RNA.
  2. Binding and Fusion: Receptor molecules are present on the cell surface. Virus binds to these receptors to fuse with the cell. The receptors include a CD4 Receptor and one of two “co receptors” (either CCR5 or CXCR4).
  3. Infection: Virus penetrates human cell, and contents are emptied into the cell.
  4. Reverse Transcription: Single strands of viral RNA are converted into double-stranded DNA by the reverse transcriptase enzyme.
  5. Integration: Viral DNA is combined with the human cell’s own DNA by the integrase enzyme.
  6. Transcription: When the infected cell divides, the viral DNA is “read” to form single strand mRNA.
  7. Translation: Further processing converts mRNA to form long chains of proteins.
  8. Assembly: Sets of viral protein chains come together.
  9. Budding: Immature virus pushes out of the cell, taking some cell membrane with it. The protease enzyme starts processing the proteins in the newly forming virus.
  10. Immature virus breaks free of the infected cell.
  11. Maturation: The protease enzyme finishes cutting HIV protein chains into individual proteins that combine to make a new working virus. Repeat cycles lead to formation of multiple viruses.
Retrieved from http://nirog.info/index.php?n=STD.HIV-lifecycle
Page last modified on February 05, 2010, at 01:39 AM EST